Thursday, September 2, 2010

जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ...आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं


चली सखियों के संग राधिका रानी ,
मटकी लेकर भरने को पानी,
मधुबन में अतिशय हरियाली ,
कूकती कोयल झूमती डाली ,

पनघट से मटकी भर कर के ,
लौट के घर को , जा वो रहीं थी ।
सखियों के संग मिल कर के कोई
गीत सुहाना गा वो रहीं थी ।

दूसरी ओर.....

यशोधरा नंदन कृष्ण कन्हैया ,
चरा रहे ग्वाल सखा संग गैया ।
देख के राधा को जा छिपे कान्हा ,
आड़ से मटकी पे साधा निशाना।

मटकी है तोड़ी भला किसने यह,
सोच रही थी राधा की सखियाँ ।
पेड़ों की झुरमुट में कौन छिपा वह
खोज रहीं थी राधा की अँखियाँ।

राधा जी जन जाती हैं की कौन हैं....

हम जान चुके हैं की कौन छिपा है
मुरली मनोहर सामने आओ ।
तोड़ते हो क्योँ मटकी हमारी ,
क्यों छेड़ते हो ,हमको बतलाओ ।

जाएंगी हम अब गाँव तुम्हारे ,
मैया को सब करतूत बताने ।
ऐन्ठेगी जब वो कान तुम्हारे ,
तब आएगी अकल ठिकाने ।

कृष्ण जी कहते हैं ...........

हे बृज भूषन राधिका रानी ,
रुष्ट न हो हम ला देंगे पानी ,
तुम हो मेरे लिए प्राण प्रिया तुम
समझी नहीं वह प्रीत की बानी ।

उत्तर प्रतिउत्तर का क्रम सुरु हो जाता है ..........

मार पड़ेगी ये सोच के कैसा ,
प्रीत का ढोंग रचाए रहे हो।
छोड़ के माखन खाना क्यों ,
कैसे माखन आज लगाये रहे हो ।

ये सत्य है राधा के प्रेम है तुमसे
ये पूछ लो चाहे सारे मधुबन से ।
बृज रज कण या बृज जन जन से ,
ये पूछ लो चाहे ये मुरली की धुन से ।


मुरली बजा कर स्वांग रचा कर ,
जीत लो चाहे सारे मधुबन को ।
पर बात मेरी यह मान लो छलिया
जीत न पाओगे राधा के मन को ।

ऐसा सुन कर कृष्ण भगवान् मुस्कुराते हैं और.....

काढ कटी से वेणु उसी छन
मंद मंद मुस्काए रहे थे ।
मंत्र मुग्ध सी राधा खड़ी थी
कान्हा मुरली बजाये रहीं थी ।

काल गति भी थम सी गयी थी
त्रिभुवन भी हर्षाये रहे थे।
रिमझिम पुष्पों के वर्शनमें ,
राधा कान्हा नहाये रहे थे।


अभी इस काव्य का पूरा होना शेष है
यह अब से दो वर्ष पूर्व लिखा गया है जब मैं
१२ में पढता था .........
आज इसे अअपे समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ .....

3 comments:

upendra said...

राघे कृष्न की बहुत अच्दी लीला का वर्णन. इसे लिखने में बहुत परिश्रम लगा होगा. बहुत उम्दा....

kedar said...

Bahut hi achhi rachan, bhagwan ko samapit bahvon ke sath. Iswar aapko aur yas aur samman de.

aditya kumar said...

upendra ji avm kedar ji apka hardik dhanyavad vyakt karta hun bas isitarah mera sath dete rahiyega......

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