Friday, August 2, 2013

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

मेरे मन का तुम आकर्षण हो
इस ह्रदय का तुम स्पंदन हो
तुम कुमकुम हो तुम चन्दन हो
तुम ताजमहल से सुन्दर हो

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

तुम ही हो मेरा प्रेम राग
तुम ही हो मेरी प्रेम आग
मै भ्रमर बना तुम हो पराग
तुम मन मंदिर का हो चिराग

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

तुम ध्येय मेरे जीवन का हो
तुम ध्यान मेरे प्रतिपल का हो
तुम हिरणों की चंचलता हो
तुम्हे पाना एक सफलता हो


बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

मै वैरागी , तुम माला हो
मै प्यासा , तुम मधुशाला हो
प्रेम क्षुधा छलकाने वाली
तुम यौवन की हाला हो

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

तेरे नैन नक्श सब तीखे है
तेरे आगे बाकि सब फीके है
तेरे आगे पीछे ड़ोल रहे
तुझे देख देख कर जीते है

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

तुम हो सरिता का कल कछार
तुम पहली बारिश की फुहार
तेरी नयन रेख एक तीव्र बाण
हो जाती है मेरे आर पार

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो
दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

शब्दकार : आदित्य कुमार

4 comments:

shikha kaushik said...

सुन्दर अभिव्यक्ति .शुभकामनायें
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
भारतीय नारी

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

प्रभावी !!!
शुभकामना
आर्यावर्त

aditya kumar said...

Shikha Kaushik Ji aapka hardik aabhar

aditya kumar said...

Rajneesh K Jha Ji appka hardik aabhar aap mere blog par aaye or subhkamnaye di...

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